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Saturday, November 7, 2009

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सचिव वैद्य गुरु तीन जो प्रिय बोलाही आस |
राज धर्म तन तीन कर होई बेगाही नाश ||

YMI - Ye Mera India Sher o Shayari

I searched net but I was not able to find the Shers(common hindi verse) spoken in YMI movie.So here is the Sher Shayari of the Movie Ye Mera India

किरण चाहू तो दुनिया के सरे अँधेरे घेर लेते है |
कोई मेरे तरह जी ले तो जीना भूल जायेगा ||


साथ भी छोडा तो कब,जब सब बुरे दिन कट गए |
ज़िन्दगी तुने कहा आकर दिया धोखा मुझे ||

हमें इस चिस्त से उम्मीद क्या थी और क्या निकला |
कहा जाना हुआ था तय कहा से रास्ता निकला ||
खुदा जिनको समझते थे वो शीशा थे न पत्थर थे |
जिसे पत्थर समझते थे वही अपना खुदा निकला ||

जिसने इस दौर के इन्सान किये है पैदा वो मेरा भी खुदा होगा मुझे मंज़ूर नहीं |

अगर टूटे कीसी का दिल ,तो शब् भर आख रोती है |
ये दुनिया है गुलो की जी इसमें काटे पिरोती है ||
हम मिलते है अपने गाओ में दुश्मन से भी इठला कर |
तुम्हारा शहर देखा तो बड़ी तकलीफ होती है ||

तुम्हारे जैसे हमने देखनेवाले नहीं देखे |
जिगर में किस तरह से रंजो ग़म पाले नहीं देखे ||

यहाँ पर जात मजहब का हवाला सबने देखा है|
किसी ने भी हमारे पाओं के छाले नहीं देखे ||

कदम उठने नहीं पाते, के रास्ता काट देता है|
 मेरे मालिक मुझे आखिर तू कब तक आजमाएगा||

मेरी आँखों में आसूं ,तुझसे हम दम क्या कहूं क्या है.
ठहर जाये तो अंगारा है,बह जाये तो दरिया है.